Child caught in spat - Crio ( Trio ) World School, Bangalore I Want to Paint Shashi Tharoor’s Mother Nude …
May 24

हालांकि मैं कभी भी क्रिकेट का फेन नही रहा और ना ही मैं कभी कोई मैच देखता हूँ लेकिन आज कुछ क्रिकेट पर लिखने को मन कर आया. मेरी नजर मे क्रिकेट खेल नही, व्यवसाय है और क्रिकेट के बड़े बड़े आका हम सब की जेबों से पैसा निकाल कर अपनी अपनी जेबे गर्म कर रहे है ! ये सच्चाई है कि पैसा कोई पेड़ से नही बरसता और ना ही किसी फेक्टरी मे बनाया जा सकता है … बस जो धन दुनिया मे उपलब्ध है उसी मे से किसी तरह कमाया जा सकता है. कोई मेहनत से कमाता है तो कोई हेराफेरी से … या फ़िर कोई ऐसा तरीका चुनता है की चारो और से पैसा उसके पास खिचा चला आए. इसी को कहते है आईडिया … और फ़िर सब वाह वाह कर उठते है की … क्या आईडिया है, पैसा ख़ुद ब ख़ुद चल कर आ गया और जिससे गया उसे महसूस भी नही हो पाया.

आईपील मे टीमें खरीदी गई करोडो डोलर्स मे और फ़िर खिलाडियों को तनख्वाह दी जा रही है … वो भी करोडो डोलर्स मे .. और उसके बाद तमाम खर्चे ! जो पैसा आईपील मे बोल रहा है .. ये कही पेड़ से तो झडा नही … गया हम सब की जेब से ही है .. और हमे तब तक महसूस भी नही होगा जब तक हम गंभीरता से सोचे नही नही.. !

एक बात और मेरी समझ के परे है की जब सारा खर्चा और सारी कमाई हिंदुस्तान मे रुपयों मे हो रही है तो ये बीसीसीआई और आईपील वाले डोलर्स डोलर्स क्यो चिल्लाते है ! सब डोलर्स मे बात करेंगे .. खर्चे से ले के कमाई तक. … अब तक हिन्दी मे बात करने मे इन लोगो को बेइज्जती और छोटापन महसूस होता था अब रुपयों की भी बात करने मे भी इन्हे शर्मिंदगी होती है…. हां भाई सही है .. स्टैंडर्ड की बात जो है …! कैसे समझाए इन लोगो को की हिन्दुस्तान के ९४-९६% लोगो को डॉलर की रुपये मे कीमत भी पता नही … और बात अंग्रेजी की तो हिन्दुस्तान मे अभी भी ७०-७५% लोग अंग्रेजी नही समझते ! और जो २५-३०% लोग अंग्रेजी से वाकिफ भी है उनमे से ८०% लोग बमुश्किल कुछ ही अंग्रेजी वाक्यों को समझ पाते है .. ! खैर फिलहाल यह मसला भाषा या नोटों का नही .. बल्कि क्रिकेट के व्यवसाय का है.

अब एक और बात जो मुझे बड़ी अजीब सी लगाती है वो ये कि टीमों को बनाया किस आधार पर गया…. ! कोल्कता की टीम का मालिक ना तो कोल्कता का है .. ना ही टीम के आदमी और ..नही वह कोई रहता या प्रेक्टिस करता है. फ़िर भला ये टीम कोल्कता टीम किस लिहाज से कहलाई जाती है ? .. और फ़िर जम्मू की या पटना की या आसाम की टीम क्यो नही है ? देश के सबसे बड़े और चर्चित राज्यों मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के नाम पर टीम क्यो नही है ? ये सब नामकरण लोगो की भावनाओ से पैसे बनने का है … राजस्थान के लोग समझे की राजस्थान रोय्लेस हमारी है … और तमिलनाडु के लोग समझे कि चेन्नई वाली हमारी .. और लुटाये अपने पैसे …..!! अब कौन दिमाग लगाये कि सारी कि सारी टीम मुम्बईया है और वही के बड़े बड़े होटलों मे रहती है .. फ़िर जहा जहा मैच होते है बस वह का वीआईपी दौरा !! तमिलनाडु के लोगो को कम से कम धोनी से ये तो पूछना चाहिए कि वो चेन्नई या तमिलनाडु के किसी भी इलाके मे कितने दिन रहे है ???

खैर और ना जाने कितनी कितनी बातें है जो साफ करती है कि क्रिकेट खेल नही धंधा है पर चलो किसी दिन और कुछ बातें करते है ….. हां लेकिन ये तो कहूँगा कि वाह क्या धंधा है …!!

written by admin

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