Oct 24

आज बीबीसी की सबसे ऊपर की न्यूज़ थी “शेयर मार्केट में हाहाकार” ….. तो मैंने भी सेंसेक्स पर नजर डाली .. अरे बाप रे ये तो ९००० के भी नीचे चला गया ..!  वैसे ये होना ही था .. लेकिन इतनी जल्दी .. हाई स्पीड से … सोचा न था !

सब जगह एक जैसी ही  ख़बरे है ..  शेयर मार्केट धराशायी … मार्केट से सारा पैसा गायब … डूब गए शेयर दलाल .. ना जाने क्या क्या  ..

खैर मामले पर ज़रा ढंग से गौर किया जाए ..  कि आख़िर सारा पैसा कहा गायब हो गया ..किधर चला गया ? उड़ गया या जल गया ? जमीं खा गई या आसमान निगल गया ? ..  और जब शेयर मार्केट कुलांचे भर रहा था और चारो ओर शोर  हो रहा था कि हिंदुस्तान का आदमी मालामाल हो रहा है … तब इतने धन कि उत्पत्ति कहा से हो गई थी ??

नही नही … ऐसा कुछ भी नही है .. ! जरा गहरे में जाए तो ये सब पूंजीपतियों का एक चौपड़  जैसा खाले है जिसमे मीडिया आगे कि लाइन मैं बैठी ताली बजाती, चिल्लाती है और आम आदमी दूर बैठा मूक दर्शक.

पहली बात तो पैसे ( धन , Money ) की सीधे सीधे छपाई नही हो सकती , कही पेड़ पर नही लगता .. कही फैक्ट्री में भी नही बन सकता . जितनी भी धन सम्प्पति  दुनिया मैं मौजूद है वह दुनिया के लोगो की रोज की मेहनत के बल पर धीरे धीरे ही बढ़ता है … !  और ये नही हो सकता की सरे लोग १ दिन अच्चानक ८-१०  गुना मेहनत कर के संपत्ति बढ़ा ले ..! क्या ये हो सकता है की १-२ दिन में देश में सारी सड़के बना दी जाए ? १-२ दिन में सारी फसले उगा ली जाए और भण्डार भर जाए ?  नही बिल्कुल नही .. बस ये हो सकता है की आप कई दूसरे भंडारों से निकाल कर किसी एक भण्डार को पूरा भर दे.

ठीक यही होता है शेयर मार्केट मैं. अभी मार्केट बहुत नीचे है ..और पैसा नही है .. इसका ये मतलब नही कि पैसा उड़ गया .. बल्कि कुछ खास लोगो  ने  सारा पैसा अपनी अंटी में कर लिया है ! और ये वही खास लोग है जो बड़े बड़े बिज़नस चलते है .. और बरसो से इस कारोबार में है .. और बरसो से ना जाने कितना कमा रहे है … ! अब आप ख़ुद अनुमान लगाईये कि इतना सारा पैसा लाखो करोडो लोगो ने जो एक हुंडी ( share market ) रख रखा था … उसे कुछ सौ या हजार लोग निकाल के भाग गए !!!!! तो सोचिये कि वो लोग रातो रात कितने माला माल हो गए.. ? आदमी को कुछ समझ ही नही आया कि क्या हो रहा है .. और जब तक कुछ समझ आता .. तब तक बड़ी मछलिया चारा ले के भाग निकली और बचा तो परेशानी और विलाप. शेयर के बड़े चालबाजों और दलालों की सामान्य  कमाई  भी एक आम आदमी कि कल्पना से भी परे है, फ़िर ये तो विशेष कमाई का मौका है.

तो फ़िर ये इतना हो हल्ला क्यो कर रहे है ….?? कारण है “कम कमाई” … जिसे इनकी भाषा में हमेशा नुकसान कहा जाता है..! और दूसरे को माल ले जाते देख ख़ुद चिल्लाने लगना वो ज्यादा ले गया और मुझे नुकसान  हो गया  ( नुकसान मतलब कम कमाई )…  ! आम आदमी की तो खैर वैसे ही कोई सुनवाई नही है … जाए तो जाए कहा .. उसने अगर कोई पैसा मार्केट में लगा रखा है तो उसके पास इतना वक़्त ही नही होता कि वह नफा नुक्सान का हिसाब लगा सके.

तो फ़िर मार्केट इतनी जोर से बढ़ा क्यो था ?  जब रातो रातो नोट नही छपे जा सकते  तो फ़िर अचानक से मार्केट कि ये उचाई ? ये  एक बड़ा छलावा था. अगर आप गौर करे तो एक शेयर दलाल का मुख्य काम होता है मार्केट गिरने पर शेयर खरीदना और बढ़ने पर बेचना ..! अब अगर मार्केट घटे बढे नही फ़िर धंधा कैसे चले ? कमाई कैसे हो ? तो कुछ लोगो का काम यही होता है कि मार्केट को कंट्रोल करे .. उसको घटाए फ़िर  माल ख़रीदे ..और फ़िर खूब बढाये .. और माल बेच दे..  जब बिक जाए तो फ़िर घटाए और फ़िर ख़रीदे .. ये एक अंतहीन प्रक्रिया है. रिलायंस परिवार का कई बार ये काम को अंजाम देने में नाम उछला  है .. और ये भी कहा जाता है कि सेंसेक्स अम्बानी परिवार कि मर्जी का गुलाम है. खैर मैं ऐसा नही मानता है .. मैं मानता हूँ कि कई और ऐसे परिवार और बिज़नस घराने है जिनका सेंसेक्स गुलाम  है ..!

तो पहले तो एक ऐसा माहौल बनाया गया कि भारत बहुत ज्यादा तरकी कर रहा है ..और बहुत पैसा सम्पति बन रही है .. अगर इसमे हिस्सेदारी चाहिए तो आओ .. शेयर मार्केट में पैसा लगाओ और दिन दोगुना रात चौगना कमाओ .. !  और फ़िर कहते है ना कि  लालच बुरी बला ..  अमीर गरीब आम ख़ास दलित सवर्ण .. सब चल दिए पैसे लगाने ..  सबको पूरा भरोसा हो गया था कि पैसा दोगुना चार गुना होने वाला है … रही कसार विदेशी भारतीयों ने कर दी और लगा डाला अपने डालरों को … देखते देखते सेंसेक्स २० .. २१.. २२ हज़ार पर पहुच गया .. और अब तो बहुत माल जमा हो चुका था .. तो बारी थी चतुर चालक भेड़ियों की.. सब माल बटोरा और चल दिए … !

यहाँ आप सबका सवाल होगा कि ये तो विदेशो में आई गिरावट का नतीजा है ..इन भेड़ियों की वजह से नही है .., लेकिन थोड़ा और उपर सोचे तो ये ऐसे लोग हर देश में मौजूद है और उनके उपर और भी कई सुपर चालक लोग है ! अमेरिका और यूरोप मैं इन्हे लॉबी बाज़ कहा जाता है .. और मार्केट पर इनकी पकड़ बहुत मजबूत होती है.

वैसे ऐसा  बरसों से होता रहा है .. अन्तर सिर्फ़ इतना है की इस बार बहुत ज्यादा स्पीड से मार्केट चढ़ गया और फ़िर एकदम बुलबुला फट पड़ा. और सब धराशयी .. ! इसमे बाद सारे लोबी बाज़, शेयर दलाल, बड़े बिज़नस मालिक, सरकार मिल कर सम्हालने की कोशिशे करने लगी .. ये इतना ज्यादा ख़राब हो गया कि कुछ भी कंट्रोल नही हो पा रहा है ..! आग से ये सब लोग इतने खेले कि अब आग बुझाने का नाम नही ले रही है ..और इनके ही हाथ जलने लगे है ..! आम आदमी को तो ये पहले जला चुके थे .. तो वो बेचारा असहाय पड़ा है… !

फ़िर भी इन चल्बजो कि कितनी भी ख़राब हो जाए स्थिति आ जाए .. ये अमीर हे रहेंगे …और लुट गया बर्बाद हो गया चिल्लाते रहेंगे. मीडिया भी इन्ही लोगो के पीछे भागती रहेगी !  हाल ही में दिवालिया हुई कंपनी Lehman Bro के सीईओ  Richard Fuld  जाते जाते $२२ मिलियन डालर ले गए .. उनको  retirement pay के नाम पर ये पैसा मिला ( या कहो कि निकाला ). जबकि कंपनी में इस पद पर रहते हुए उन्होंने १५ साल में ४८४ मिलियन डालर कमाए. ये तो सिर्फ़ सीईओ कि बात है .. बाकी सभी आला अफसरों ने भी मोटी मोटी रकम अपनी अंटी में कि और चल दिए फ़िर एक नए ‘लूट-प्लान’ पर.

अब भला आप ही बताईये कि दिवालिया हुई इस कंपनी से वास्तव में कौन लुटा ?

और धराशायी हुए इस शेयर मार्केट में हकीकत में रोटी के लाले किसके पद रहे है ?

written by admin

Jul 21

I found this article recently. Its old, filmed in 2006, but quite interesting.

“Morgan Spurlock’s volunteer, a successful computer programmer who lost his lucrative job to outsourcing, travels to India to try to get it back. Will he discover the secret of India’s success? Or that sending jobs overseas is an unstable gamble? In the 1980s American corporations realised they could manufacture their goods cheaper in a foreign country and millions of American factory workers were left unemployed. In the 1990s it was the turn of the white-collar worker, as the advent of the internet allowed companies to fire expensive American employees and hire foreign franchises to run key parts of their businesses. This is outsourcing. With its well-educated, English-speaking workforce, India is fast becoming the destination of choice for outsourced jobs in technology and customer services.” read article in full

written by admin

Jul 18

All we are scared of inflation going on in India .. reached more then 11%  but think what can happen when inflation touches more then 2.2 Million percent (22 lakh %) ………..

A recent hyper inflation generated in Zimbabwe ! …  Yesterday’s official figures was 2.2 Million percent price high ..! A packet of bread now costs what 20 new cars did a year ago. Today billionaires are fighiting to buy a few packets of breads ! At present, a single loaf of bread costs nearly 100 billion Zimbabwe dollars.

It said laundry soap on the black market went up by 70 million percent, cooking oil by 60 million percent and sugar by 36 million percent — far higher than the official inflation rate of 2.2 million percent calculated by the Central Statistical Office on basic goods subject to price regulation and price increases approved by state National Prices and Incomes Commission. It acknowledged that private consultants calculated overall real inflation closer to 12.5 million percent.

It said a 4-pound bag of sugar cost about 20 billion Zimbabwe dollars — $1 — at the government’s fixed price, and 90 billion on the black market $4.50 at the bank exchange rate, or $1 at the black market exchange — in a country where unskilled workers earn up to 200 billion Zimbabwean dollars, about $10, a month.

However, few have jobs: unemployment has reached 80 percent.

I cant even imagin whats on road situation and how peoples feeding there childern. It all happened in Robert Mugabe’s rule… the worst managment of resources.  World should learn that choosing a leader and voting a  good candidate is how much important.

written by admin

Jun 06

So today’s Inflation figure annonced .. as expected, it is going higher .. 8.24%. This is time to think each and every individual, where the graph going on and what may be the real impacts… if we generate a graph from last 1 year inflation data, you will soon realize that in next one year we will be in super-inflation situation and in next 2-3 years, we may be caught by hyper-inflation.

Inflation rate - worldwide

There are many countries in world who was affected by hyper-inflation time to time. Here are few extreme cases from wiki :

  • Germany in 1923 when the rate of inflation hit 3.25 × 106 percent per month (prices double every two days).
  • Greece during its occupation by Nazi Germany in 1941-1944, when the rate of inflation hit 8.55 × 109 percent per month (prices double every 28 hours).
  • Yugoslavia’s rate of inflation hit 5 × 1015 percent inflation between 1 October 1993 and 24 January 1994 (prices double every 16 hours).
  • The most severe known incident of inflation was in Hungary after the end of World War II, peaking at 4.19 × 1016 percent per month (prices double every 15 hours).

<editing continues ..>

written by admin

May 26

Because … “Nudity isn’t obscenity, it’s just art” …. said by Mr Shashi Tharoor, TOI 25-May-08. ( read article )
Ones again Mr. Shashi Tharoor published a column in Sunday Times, in favor of M.F. Hussain. I don’t know what connection or agreement he has with Mr Hussain, but he is not only doing an unusual favor of Mr Hussain, but also justifying the nude paintings of Hindu god and goddesses.

I want to let you know my friends, a partial collection of what M.F. Hussain painted, can be seen here : http://protestnudebharatmatha.blogspot.com . These are only few pictures, many are so vulgar and obscene and can not be published.

I written replies of all his last 3 articles on MF Hussain. And now going to reply his 4th article. I did not published my replies to my blog or anywhere, because I thought, those emails/replies should certainly change Shashi’s views and he will stop hurting millions of Indians. …Also why to write bad or negative about someone publicly.

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written by admin

May 24

हालांकि मैं कभी भी क्रिकेट का फेन नही रहा और ना ही मैं कभी कोई मैच देखता हूँ लेकिन आज कुछ क्रिकेट पर लिखने को मन कर आया. मेरी नजर मे क्रिकेट खेल नही, व्यवसाय है और क्रिकेट के बड़े बड़े आका हम सब की जेबों से पैसा निकाल कर अपनी अपनी जेबे गर्म कर रहे है ! ये सच्चाई है कि पैसा कोई पेड़ से नही बरसता और ना ही किसी फेक्टरी मे बनाया जा सकता है … बस जो धन दुनिया मे उपलब्ध है उसी मे से किसी तरह कमाया जा सकता है. कोई मेहनत से कमाता है तो कोई हेराफेरी से … या फ़िर कोई ऐसा तरीका चुनता है की चारो और से पैसा उसके पास खिचा चला आए. इसी को कहते है आईडिया … और फ़िर सब वाह वाह कर उठते है की … क्या आईडिया है, पैसा ख़ुद ब ख़ुद चल कर आ गया और जिससे गया उसे महसूस भी नही हो पाया.

आईपील मे टीमें खरीदी गई करोडो डोलर्स मे और फ़िर खिलाडियों को तनख्वाह दी जा रही है … वो भी करोडो डोलर्स मे .. और उसके बाद तमाम खर्चे ! जो पैसा आईपील मे बोल रहा है .. ये कही पेड़ से तो झडा नही … गया हम सब की जेब से ही है .. और हमे तब तक महसूस भी नही होगा जब तक हम गंभीरता से सोचे नही नही.. !

एक बात और मेरी समझ के परे है की जब सारा खर्चा और सारी कमाई हिंदुस्तान मे रुपयों मे हो रही है तो ये बीसीसीआई और आईपील वाले डोलर्स डोलर्स क्यो चिल्लाते है ! सब डोलर्स मे बात करेंगे .. खर्चे से ले के कमाई तक. … अब तक हिन्दी मे बात करने मे इन लोगो को बेइज्जती और छोटापन महसूस होता था अब रुपयों की भी बात करने मे भी इन्हे शर्मिंदगी होती है…. हां भाई सही है .. स्टैंडर्ड की बात जो है …! कैसे समझाए इन लोगो को की हिन्दुस्तान के ९४-९६% लोगो को डॉलर की रुपये मे कीमत भी पता नही … और बात अंग्रेजी की तो हिन्दुस्तान मे अभी भी ७०-७५% लोग अंग्रेजी नही समझते ! और जो २५-३०% लोग अंग्रेजी से वाकिफ भी है उनमे से ८०% लोग बमुश्किल कुछ ही अंग्रेजी वाक्यों को समझ पाते है .. ! खैर फिलहाल यह मसला भाषा या नोटों का नही .. बल्कि क्रिकेट के व्यवसाय का है.

अब एक और बात जो मुझे बड़ी अजीब सी लगाती है वो ये कि टीमों को बनाया किस आधार पर गया…. ! कोल्कता की टीम का मालिक ना तो कोल्कता का है .. ना ही टीम के आदमी और ..नही वह कोई रहता या प्रेक्टिस करता है. फ़िर भला ये टीम कोल्कता टीम किस लिहाज से कहलाई जाती है ? .. और फ़िर जम्मू की या पटना की या आसाम की टीम क्यो नही है ? देश के सबसे बड़े और चर्चित राज्यों मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के नाम पर टीम क्यो नही है ? ये सब नामकरण लोगो की भावनाओ से पैसे बनने का है … राजस्थान के लोग समझे की राजस्थान रोय्लेस हमारी है … और तमिलनाडु के लोग समझे कि चेन्नई वाली हमारी .. और लुटाये अपने पैसे …..!! अब कौन दिमाग लगाये कि सारी कि सारी टीम मुम्बईया है और वही के बड़े बड़े होटलों मे रहती है .. फ़िर जहा जहा मैच होते है बस वह का वीआईपी दौरा !! तमिलनाडु के लोगो को कम से कम धोनी से ये तो पूछना चाहिए कि वो चेन्नई या तमिलनाडु के किसी भी इलाके मे कितने दिन रहे है ???

खैर और ना जाने कितनी कितनी बातें है जो साफ करती है कि क्रिकेट खेल नही धंधा है पर चलो किसी दिन और कुछ बातें करते है ….. हां लेकिन ये तो कहूँगा कि वाह क्या धंधा है …!!

written by admin

May 20

Today I read the news in TOI, about pure rowdyism of private schools. Main problem is, we dont have any law which can punish these schools in any way. These schools running by most influence peoples and you cant through single word to them. We are still “GHULAM” in our country by these so called “best-English-schools”. If you have any problem with school, they simply fire you.

“We reserve the right of admission, If you have any problem, then get out with your child… your admission is canceled. ” - This is the most conman sentence which we all face time to time. You might have daring .. but how .. where to complain ? under which law ??

Naveen (school owner) added:”I had told Shreyas’ mother not to accompany him. But she did.

Uffff … Quite panic, a mother is not allowed to accompany her innocent kinder garden baby ? who will ? these rowdy schools ?????

Parents should come together and fight such situations with unity … [ huh …Unity ….that looks impossible, what I m taking about ]

————

( Article from  TOI, I found later, school name is misspelled, Correct name is Trio World School )

BANGALORE: A six-year-old child, Shreyas, is missing school for no fault of his. He is caught in a spat between his mother and the school. He was allegedly not permitted to enter the school by the school authorities on Monday morning.

Shreyas’ mother, Sunitha Ashok Shankar, charged the school, Crio World, located in Sahakarnagar, for not giving any reason for this act.”My first son, Aryaman, goes to kindergarten there. For two days, he came back famished and feverish. I got to know he wasn’t given food. I filed a complaint with the local police four days back and an FIR was registered. Today, I found my second son not being allowed into the school,” Sunitha said.

School owner Manjunath and his son Naveen acknowledged they had not allowed Shreyas inside the school. Manjunath said:”The parents had already created a problem with one child. We didn’t want the school’s atmosphere to be disturbed again, that too with exams for other students going on.”

Manjunath added:”Why wouldn’t we want to give food to a child?” Naveen added:”I had told Shreyas’ mother not to accompany him. But she did. She had created a scene twice before here. We didn’t want that again.”

Sunitha said:”I went after I got to know that my child wasn’t allowed inside. I asked them why they weren’t doing so, that too as his grading was to begin from today.” Sunitha said she approached ACP (law and order) Bipin Gopal Krishna.

Source : http://timesofindia.indiatimes.com/Cities/Bangalore/Child_caught_in_spat/rssarticleshow/3055071.cms

written by admin

May 10

अरे भाई ये तो कमाल हो गया ! गूगल ने अपने अनुवाद सेवा ( translation service ) मे हिन्दी की सुविधा भी प्रदान कर दी है. यह एक बहुप्रतिक्षित और हिन्दी के क्षेत्र मे क्रांतिकारी कदम है. गूगल पहले ही हिन्दी की बेहतरीन transliteration ( आनुवादिक लेखन प्रणाली ) पेश कर चुका है जिसके सहयोग से लाखो लोगो ने हिन्दी लिखना शुरू कर दिया है. इंटरनेट पर यह काफ़ी कारगर साबित हुआ है. इसकी खास विशेषता है … शुद्धता ! यह रोमन लिपि मे लिखे शब्दों को Artificial intelligence से शब्दकोष से निकाल कर लिखता है .. और साथ मे विभिन्न विकल्प भी प्रदान करता है.

लेकिन हिन्दी से और में अनुवाद तो भाई चमत्कार है. गूगल पहले से लगभग २० से भी ज्यादा भाषाओ मे अनुवाद सेवा प्रदान कर रहा था. हिन्दी दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है. पहले नम्बर पर चीनी है और अंग्रेजी तीसरे नम्बर पर आती है. ये देख के बड़ा दुःख होता था की हिन्दी से १/१० गुना कम बोली जाने भाषाओ के लिए इंटरनेट पर सब कुछ उपलब्ध है लेकिन हिन्दी मे कुछ नही ! इससे सबसे बड़ा फायदा उन्हें होने वाला है जो हर सूचना और साहित्य को पढ़ना और समझाना चाहते है बिना किसी भाषा की बाध्यता के. यानी की अब अगर मेरे दादाजी को अंग्रेजी या किसी और भाषा मे लिखी चीजे समझ मे नही आ रही तो उसे फटाफट हिन्दी मे अनुवाद कर के पढ़ सकते है. किसी दवा के ऊपर लिखा तरीका या नुस्खा समझ नही आ रहा तो बस उसे गूगल पर टाइप कर अनुवाद कर लीजिये.
मेरे एक मित्र है जो नीदरलैंड मे रहते है .. और वह सब कुछ डच भाषा मे लिखा होता है .. उसे समझने के लिए वो लंबे समय से गूगल ट्रांसलेशन की सेवा ले रहे है. डच और चीनी भासा मे लिख के आने वाले ई-मेल को मैं भी गूगल ट्रांसलेशन का सहारा लेता हूँ. और अब हिन्दी मे लिखे जाने वाली बातो को दुनिया के लोग आसानी से अपनी भासा मे अनुवाद कर समझ सकेंगे. मतलब ये की मे मेरी कंपनी के अमेरिकन सीईओ को हिन्दी मे भी ईमेल कर सकता हूँ.

है ना चमत्कार .. भाषा विवाद से मुक्ति. अब चाहे जर्मन साहित्य को हिन्दी मे पढिये या फ्रेंच के नाटकों को. या फ़िर चीनी पारम्परिक नुस्खो को !

हालाकि अभी अनुवाद इतना सटीक नही है … कई चीजो मे गलतिया होती है …. कई बार ढंग से वाक्य नही बनता लेकिन शुरुआत बहुत अच्छी है . १००% सही अनुवाद तो अभी तक किसी भाषा के लिए उपलब्ध नही है और ना ही हो सकता है … अब आप ही बताइए की जर्मन कविताओ का हुबहू अंग्रेजी अनुवाद कैसे सम्भव है. तो हिन्दी मे गूगल ने जो प्रदान किया है वो उम्मीद से भी बेहतर है. हालाकि और भी कई कंपनियाँ अनुवाद क्षेत्र मे है .. जैसे बिग्फिश, लेकिन अभी तक किसी और ने हिन्दी के लिए कुछ नही किया. इसलिए गूगल इस फ्री सेवा को शुरू करने के लिए धन्यवाद का पात्र है.

http://www.google.com/language_tools

तो चलो इस फ्री सेवा का आनंद उठाये, सब सूचनाओ को आम आदमी को सुलभ बनाये और हिन्दी भाषा को नए आयाम तक ले जाए.

I will add this service for on-fly translation of any webpage, in Hindi Toolbar ( http://satyadev.net/toolbar/ ) soon.

written by SatyaDev \\ tags: , , , ,

Feb 10

पिछले सप्ताह महर्षि योगी का निधन हो गया ! मैं उनके बारे में कुछ और जानने की चाहत मे पर इधर उधर पढ़ ही रहा था कि मुझे पता चला कि योगी जी ने नीदरलेन्ड मे बाकायदा राम राज्य मुद्रा प्रचालित की, तो मेरे आश्चर्य का ढिकाना ना रहा । सचिन शर्मा जी के इस आलेख पर मुझे पता चला तो फिर तो मैने गूगलिंग कर डाली … और मिले ये राम राज्य मुद्रा के नोट, जिन्हे नीदरलेन्ड सरकार ने बाकायदा मान्यता भी दी।

Raam Note Raam Note Back

और अधिक यहां देखें - http://www.numismondo.com/pm/gcp/

हिन्दुस्तान मे रह कर हम राम को सुरक्षित नही रख पा रहे है, अगर कोई शासकीय कर्मचारी किसी हिन्दू धार्मिक आयोजन में चला जाता है तो उस पर आचार संहिता का आरोप लगा कर जाँच बिठा जाती है और नीदरलेन्ड मे शासन से मान्यता प्राप्त राम राज्य मुद्रा है !

है ना कमाल की बात !

written by admin

Feb 10

महर्षि महेश योगी ने सारी दुनिया मे न सिर्फ़ भारत का नाम संवारा बल्कि भारतीय योग और धर्म को दुनिया भर में फ़ैलाया।  उनका निधन वास्तव मे भारत के लिये आघात है।

कुछ लोगो ने वास्तव मे भारतीय धर्म, योग, संस्कृति, दर्शन और विचारधारा को विश्व भर मे फैलाया है और सारी दुनिया के लोगो को इस  ज्ञान से अवगत कराया है। कुछ नाम मुझे और याद पड़ते है …

- आचार्य रजनीश

- भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद

- श्री श्री रविशन्कर ( आर्ट ओफ़ लिविन्ग )

- … और भी कई …

written by admin

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