आज बीबीसी की सबसे ऊपर की न्यूज़ थी “शेयर मार्केट में हाहाकार” ….. तो मैंने भी सेंसेक्स पर नजर डाली .. अरे बाप रे ये तो ९००० के भी नीचे चला गया ..! वैसे ये होना ही था .. लेकिन इतनी जल्दी .. हाई स्पीड से … सोचा न था !
सब जगह एक जैसी ही ख़बरे है .. शेयर मार्केट धराशायी … मार्केट से सारा पैसा गायब … डूब गए शेयर दलाल .. ना जाने क्या क्या ..
खैर मामले पर ज़रा ढंग से गौर किया जाए .. कि आख़िर सारा पैसा कहा गायब हो गया ..किधर चला गया ? उड़ गया या जल गया ? जमीं खा गई या आसमान निगल गया ? .. और जब शेयर मार्केट कुलांचे भर रहा था और चारो ओर शोर हो रहा था कि हिंदुस्तान का आदमी मालामाल हो रहा है … तब इतने धन कि उत्पत्ति कहा से हो गई थी ??
नही नही … ऐसा कुछ भी नही है .. ! जरा गहरे में जाए तो ये सब पूंजीपतियों का एक चौपड़ जैसा खाले है जिसमे मीडिया आगे कि लाइन मैं बैठी ताली बजाती, चिल्लाती है और आम आदमी दूर बैठा मूक दर्शक.
पहली बात तो पैसे ( धन , Money ) की सीधे सीधे छपाई नही हो सकती , कही पेड़ पर नही लगता .. कही फैक्ट्री में भी नही बन सकता . जितनी भी धन सम्प्पति दुनिया मैं मौजूद है वह दुनिया के लोगो की रोज की मेहनत के बल पर धीरे धीरे ही बढ़ता है … ! और ये नही हो सकता की सरे लोग १ दिन अच्चानक ८-१० गुना मेहनत कर के संपत्ति बढ़ा ले ..! क्या ये हो सकता है की १-२ दिन में देश में सारी सड़के बना दी जाए ? १-२ दिन में सारी फसले उगा ली जाए और भण्डार भर जाए ? नही बिल्कुल नही .. बस ये हो सकता है की आप कई दूसरे भंडारों से निकाल कर किसी एक भण्डार को पूरा भर दे.
ठीक यही होता है शेयर मार्केट मैं. अभी मार्केट बहुत नीचे है ..और पैसा नही है .. इसका ये मतलब नही कि पैसा उड़ गया .. बल्कि कुछ खास लोगो ने सारा पैसा अपनी अंटी में कर लिया है ! और ये वही खास लोग है जो बड़े बड़े बिज़नस चलते है .. और बरसो से इस कारोबार में है .. और बरसो से ना जाने कितना कमा रहे है … ! अब आप ख़ुद अनुमान लगाईये कि इतना सारा पैसा लाखो करोडो लोगो ने जो एक हुंडी ( share market ) रख रखा था … उसे कुछ सौ या हजार लोग निकाल के भाग गए !!!!! तो सोचिये कि वो लोग रातो रात कितने माला माल हो गए.. ? आदमी को कुछ समझ ही नही आया कि क्या हो रहा है .. और जब तक कुछ समझ आता .. तब तक बड़ी मछलिया चारा ले के भाग निकली और बचा तो परेशानी और विलाप. शेयर के बड़े चालबाजों और दलालों की सामान्य कमाई भी एक आम आदमी कि कल्पना से भी परे है, फ़िर ये तो विशेष कमाई का मौका है.
तो फ़िर ये इतना हो हल्ला क्यो कर रहे है ….?? कारण है “कम कमाई” … जिसे इनकी भाषा में हमेशा नुकसान कहा जाता है..! और दूसरे को माल ले जाते देख ख़ुद चिल्लाने लगना वो ज्यादा ले गया और मुझे नुकसान हो गया ( नुकसान मतलब कम कमाई )… ! आम आदमी की तो खैर वैसे ही कोई सुनवाई नही है … जाए तो जाए कहा .. उसने अगर कोई पैसा मार्केट में लगा रखा है तो उसके पास इतना वक़्त ही नही होता कि वह नफा नुक्सान का हिसाब लगा सके.
तो फ़िर मार्केट इतनी जोर से बढ़ा क्यो था ? जब रातो रातो नोट नही छपे जा सकते तो फ़िर अचानक से मार्केट कि ये उचाई ? ये एक बड़ा छलावा था. अगर आप गौर करे तो एक शेयर दलाल का मुख्य काम होता है मार्केट गिरने पर शेयर खरीदना और बढ़ने पर बेचना ..! अब अगर मार्केट घटे बढे नही फ़िर धंधा कैसे चले ? कमाई कैसे हो ? तो कुछ लोगो का काम यही होता है कि मार्केट को कंट्रोल करे .. उसको घटाए फ़िर माल ख़रीदे ..और फ़िर खूब बढाये .. और माल बेच दे.. जब बिक जाए तो फ़िर घटाए और फ़िर ख़रीदे .. ये एक अंतहीन प्रक्रिया है. रिलायंस परिवार का कई बार ये काम को अंजाम देने में नाम उछला है .. और ये भी कहा जाता है कि सेंसेक्स अम्बानी परिवार कि मर्जी का गुलाम है. खैर मैं ऐसा नही मानता है .. मैं मानता हूँ कि कई और ऐसे परिवार और बिज़नस घराने है जिनका सेंसेक्स गुलाम है ..!
तो पहले तो एक ऐसा माहौल बनाया गया कि भारत बहुत ज्यादा तरकी कर रहा है ..और बहुत पैसा सम्पति बन रही है .. अगर इसमे हिस्सेदारी चाहिए तो आओ .. शेयर मार्केट में पैसा लगाओ और दिन दोगुना रात चौगना कमाओ .. ! और फ़िर कहते है ना कि लालच बुरी बला .. अमीर गरीब आम ख़ास दलित सवर्ण .. सब चल दिए पैसे लगाने .. सबको पूरा भरोसा हो गया था कि पैसा दोगुना चार गुना होने वाला है … रही कसार विदेशी भारतीयों ने कर दी और लगा डाला अपने डालरों को … देखते देखते सेंसेक्स २० .. २१.. २२ हज़ार पर पहुच गया .. और अब तो बहुत माल जमा हो चुका था .. तो बारी थी चतुर चालक भेड़ियों की.. सब माल बटोरा और चल दिए … !
यहाँ आप सबका सवाल होगा कि ये तो विदेशो में आई गिरावट का नतीजा है ..इन भेड़ियों की वजह से नही है .., लेकिन थोड़ा और उपर सोचे तो ये ऐसे लोग हर देश में मौजूद है और उनके उपर और भी कई सुपर चालक लोग है ! अमेरिका और यूरोप मैं इन्हे लॉबी बाज़ कहा जाता है .. और मार्केट पर इनकी पकड़ बहुत मजबूत होती है.
वैसे ऐसा बरसों से होता रहा है .. अन्तर सिर्फ़ इतना है की इस बार बहुत ज्यादा स्पीड से मार्केट चढ़ गया और फ़िर एकदम बुलबुला फट पड़ा. और सब धराशयी .. ! इसमे बाद सारे लोबी बाज़, शेयर दलाल, बड़े बिज़नस मालिक, सरकार मिल कर सम्हालने की कोशिशे करने लगी .. ये इतना ज्यादा ख़राब हो गया कि कुछ भी कंट्रोल नही हो पा रहा है ..! आग से ये सब लोग इतने खेले कि अब आग बुझाने का नाम नही ले रही है ..और इनके ही हाथ जलने लगे है ..! आम आदमी को तो ये पहले जला चुके थे .. तो वो बेचारा असहाय पड़ा है… !
फ़िर भी इन चल्बजो कि कितनी भी ख़राब हो जाए स्थिति आ जाए .. ये अमीर हे रहेंगे …और लुट गया बर्बाद हो गया चिल्लाते रहेंगे. मीडिया भी इन्ही लोगो के पीछे भागती रहेगी ! हाल ही में दिवालिया हुई कंपनी Lehman Bro के सीईओ Richard Fuld जाते जाते $२२ मिलियन डालर ले गए .. उनको retirement pay के नाम पर ये पैसा मिला ( या कहो कि निकाला ). जबकि कंपनी में इस पद पर रहते हुए उन्होंने १५ साल में ४८४ मिलियन डालर कमाए. ये तो सिर्फ़ सीईओ कि बात है .. बाकी सभी आला अफसरों ने भी मोटी मोटी रकम अपनी अंटी में कि और चल दिए फ़िर एक नए ‘लूट-प्लान’ पर.
अब भला आप ही बताईये कि दिवालिया हुई इस कंपनी से वास्तव में कौन लुटा ?
और धराशायी हुए इस शेयर मार्केट में हकीकत में रोटी के लाले किसके पद रहे है ?