कीडे मकोडे ही तो है हम

हां, जो चाहे .. जब चाहे हमें मसल दे .. रोंद डाले .. मार डाले …! कितनी बार ..कहा कहा .. अब तो लिस्ट भी बनाना मुस्किल हो गया है कि कब कहा कितने आतंकवादी हमले हुए और कितने लोग मारे गए..! पहले दशको में आतंकवादी हमले होते थे .. फ़िर सालो में ..फ़िर तिमाही और .. अब तो हर महीने …! आगे क्या … अब हर हफ्ते .. फ़िर हर दिन ! और मरते रहेंगे हम सब .. हमेशा आम आदमी ..  और कभी कभी कोई ख़ास भी !

पर क्या फरक पड़ता है .. हम तो कीडे मकोडे ही है ना… कीमत ही क्या है हमारी …!

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